भौतिक विज्ञान कक्षा 12 नोट्स

Chapter-1

(विद्युत आवेश तथा कूलाम का नियम) 

विद्युत आवेश- जब दो वस्तुओं को आपस में रगड़ा जाता है तो उन वस्तुओं में अन्य हल्की वस्तुओं को अपनी और आकर्षित करने का एक गुण आ जाताा है इस गुण को विद्युत आवेश कहतेे हैं

विद्युत आवेश दो प्रकार के होते है

1. धन आवेश 

2. ऋण आवेश

वस्तु के आवेशित होने का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत- हम जानते हैं कि सभी पदार्थ परमाणु से मिलकर बने होतेे हैं परमाणु के केंद्र पर एक धन आवेशित भाग होता है जिसे नाभिक कहते हैं इसमें प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन उपस्थित रहते हैंं जबकि नाभिक के चारो कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन उपस्थित रहते हैं परमाणु में इलेक्ट्रॉन की संख्या प्रोटोन की संख्या केेेे बराबर होती है

इलेक्ट्रॉन की संख्या = प्रोटोन की संख्या

इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटोन पर आवेश का परिमाण समान होता है जिसे मूल आवेश कहते हैं इसे e प्रदर्शित करते हैं

e पर आवेश= -1.6×10-19 कूलाम

P पर आवेश= +1.6×10-19 कूलाम

स्पष्ट है परमाणु विद्युत उदासीन होता है

यदि परमाणु की सामान्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन की संख्या कम कर दे तो वह परमाणु धन आवेशित हो जाता है और यदि परमाणु की सामान्य अवस्था में परमाणु में इलेक्ट्रॉन की संख्या अधिक कर दें तो वह परमाणु  ऋणावेशित जाता है

यदि किसी पदार्थ में n इलेक्ट्रॉन  कम या वृद्धि कर दे तो उस पदार्थ पर संचित q= ±ne

n इलेक्ट्रॉन की कमी होने पर = धन आवेश 

n इलेक्ट्रॉन की वृद्धि होने पर =ऋण आवेश

आवेश के गुण=  1. जब दो वस्तुओं को आपस में रगड़ने पर प्रत्येक वस्तु पर आवेश का परिमाण सम्मान परंतु प्रकृति में  विपरीत होता है|

2. समान प्रकृति पर आवेश एक दूसरे को प्रति आकर्षित करते हैं तथा विपरीत एक दूसरे को आकर्षित करते हैं

3. दो आवेशों के बीच लगने वाले प्रतिकर्षण बल की दिशा दोनों अवश्य को मिलने वाली रेखा के अनुदिश होती है

4. दो आवेशों के बीच लगने वाला बल प्रत्येक आवेश पर एक समान रूप से कार्य करता है अतः दो आवेश के बीच लगने वाला बल उनके आवेश की परिमाण पर निर्भर नहीं करता है अतः दोनों पर विद्युत बल एक समान रूप से कार्य करता है

5. किसी चालक पर आवेश की मात्रा सदैव मूल आवेश के पूर्ण गुणांक होती है इनके बीच में नहीं होती अतः किसी चालक पर आवेश की मात्रा q=±1e,2e,3e,4e........ हो सकती है इसके बीच में नहीं विद्युत प्रेरण के द्वारा वस्तु को आवेशित होना

विद्युत प्रेरण-किसी अनु आवेशित किसी आवेशित वस्तुओं को पर अन आवेशित वस्तु में आवेश प्रेरित हो जाता है अर्थात  उसका एक सिरा धन आवेशित तथा दूसरा सिरा ऋण आवेशित हो जाता‌ है इस घटना को विद्युत प्रेरण कहते हैं

आवेश का संरक्षण सिद्धांत- आवेश को ना तो नष्ट किया जा सकता है और ना ही उत्पन्न किया जा सकता है इसे केवल एक सिरे से दूसरे सिरे में स्थानतितन  किया जा सकता है

आवेश का मात्रक तथा विमीय सूत्र- आवेश का S.I मात्रक कूलाम है कूलाम आवेश का सबसे बड़ा मात्रक है इसे micro coulomb या  picocoulomb मैं भी व्यक्त कर सकते हैं

                     1mc = 10-6

                     1pc = 10-17

सूत्र  i = q/t से

इसलिए

i =धारा (amp)

t =  समय (sec)

q का मात्रक  = Amp×sec

विमीय सूत्र q=it

             q = [AT]

*   C.G.S पद्धति में आवेश का मात्रक फ्रकलीन या स्टेट कूलाम होता है

* आवेश का एक अन्य मात्रक फैराडे भी होता है

1F =96500c

1e.s.u = 3×10-7.    ( e.s.u= electrostatic unit)

आवेश का मात्रक amp in to sec, कूलाम, फ्रकलीन,स्टेट कूलाम तथा फैराडे होते हैं

कूलाम की परिभाषा  =    q=ne

n=q/e

q =1c

e=1.6×10-19c 

n= 1/1.6×10-19

     =6.25×1018

 अतः एक कूलाम आवेश की वह  मात्रा है जो किसी चालक को6.25×1018 इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित करने पर उत्पन्न होता है

कूलाम के नियम से कूलाम की परिभाषा - हम जानतेेे हैं कि कूलाम के नियम से दो आवेशों के बीच लगने वाला विद्युत बल

     F=9×109 q1q2/r^2

    [ F=9×109N]

अतः एक कूलाम आवेश वह आवेश है जो अपने से 1 मीटर की दूरी पर निवार्त या वायु में रखने पर किसी परिमाण के अन्य सभी जातियां

                    








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